Thursday, May 23, 2019

इंटरनेट व उसके प्रयोग Internet uses in Hindi: इंटरनेट से तात्पर्य एक ऐसे नेटवर्क से है जो दुनिया भर के लाखों करोड़ों कम्प्यूटरों से जुड़ा है

इंटरनेट व उसके प्रयोग

परिचय (Introduction)

इंटरनेट से तात्पर्य एक ऐसे नेटवर्क से है जो दुनिया भर के लाखों करोड़ों कम्प्यूटरों से जुड़ा है। कहने का मतलब यह है कि किसी नेटवर्क का कोई सिस्टम किसी अन्य नेटवर्क के सिस्टम से जुड़ कर कम्यूनिकेट कर सकता है। अर्थात सूचनाओं का आदान-प्रदान कर सकता है। सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए जिस नियम का प्रयोग किया जाता है उसे ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल या इंटरनेट प्रोटोकॉल (टीसीपी/आईपी) कहा जाता है।

इंटरनेट की सेवाएं

इसकी सेवाओं में कुछ का जिक्र यहां किया जा रहा है-

फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल (एफ टी पी)- फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल का उपयोग एक कम्प्यूटर नेटवर्क से किसी दूसरे कम्प्यूटर नेटवर्क में फाइलों को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है।

इलेक्ट्रॉनिक मेल ई-मेल- इसको संक्षिप्त रूप से ई-मेल कहा जाता है। इस माध्यम के द्वारा बड़ी से बड़ी सूचनाओं व संदेशों को इलेक्ट्रॅनिक प्रणाली द्वारा प्रकश की गति से भेजा या प्राप्त किया जा सकता है। इसके द्वारा पत्र, ग्रीटिंग या सिस्टम प्रोग्राम को दुनिया के किसी भी हिस्से में भेज सकते हं।

गो-फोर- यह एक यूजर फ्रैंडली इंटरफेज है। जिसके जरिए यूजर, इंटरनेट पर प्रोग्राम व सूचनाओं का आदान प्रदान किया जा सकता है। गोफर के द्वारा इंटरनेट की कई सेवाएं आपस में जुड़ी होती है।

वल्र्ड वाइड वेब (www)- इसके द्वारा यूजर अपने या अपनी संस्था आदि से सम्बंधित सूचनाएं दुनिया में कभी भी भेज सकता है, और अन्य यूजर उससे सम्बंधित जानकारियां भी प्राप्त कर सकता है।

टेलनेट- डाटा के हस्तांतरण के लिए टेलनेट का प्रयोग किया जाता है। इसके द्वारा यूजर को रिमोट कम्प्यूटर से जोड़ा जाता है। इसके बाद यूजर अपने डाटा का हस्तांतरण कर सकता है। टेलनेट पर कार्य करने के लिए यूजर नेम व पास वर्ड की जरूरत होती है।

यूजनेट- अनेक प्रकार की सूचनाओं को एकत्र करने के लिए इंटरनेट के नेटवर्क, यूजनेट का प्रयोग किया जाता है। इसके माध्यम से कोई भी यूजर विभिन्न समूहों से अपने लिए जरूरी सूचनाएं एकत्र कर सकता है।

वेरोनिका- वेरोनिका प्रोटोकॉल गोफर के माध्यम से काम करता है। यूजर, गोफर व वेरोनिका का प्रयोग एक साथ करके किसी भी डाटा बेस पर आसानी से पहुंच सकता है। इनके प्रयोग से जरूरी सूचनाएं तेजी से प्राप्त की जा सकती हैं।

आर्ची- फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल (एफटीपी) में स्टोर फाइलों को खोजने के लिए आर्ची का प्रयोग किया जाता है।

महत्वपूर्ण प्रोग्रामिंग भाषाएं Computer In Hindi: Machine Languages, Assembly Languages, High Level Languages..

महत्वपूर्ण प्रोग्रामिंग भाषाएं

परिचय (Introduction)
कम्प्यूटर एक मशीन है और वह हमारी बोलचाल की भाषा को समझ नहीं सकता। इसके लिए प्रोग्राम, विशेष प्रकार की भाषा में लिखे जाते हैं। इन भाषाओं को प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के नाम से जानते हैं। आजकल ऐसी सैकड़ों भाषाएं प्रचलन में हैं। ये भाषाएं कम्प्यूटर और प्रोग्रामर के बीच संपर्क या फिर संवाद स्थापित करने का काम करती हैं। कम्प्यूटर उन्हीं के माध्यम से दिए गए निर्देशों को समझकर काम करता है। कम्प्यूटर द्वारा किए जाने वाले अलग अलग कार्यों के लिए अलग-अलग तरह की लैंग्वेज का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें कुछ प्रमुख प्रोग्रामिंग लैंग्वेज इस प्रकार हैं-

लो-लेवल लैंग्वेज (Low Level Languages)
वे लैंग्वेज जो कम्प्यूटर की आंतरिक कार्यप्रणाली को ध्यान में रखकर बनाई गई हंै लो लेवल लैंग्वेज कहलाती हैं। इसमें प्रोग्राम लिखने वाले व्यक्ति को कम्प्यूटर की आंतरिक क्रिया प्रणाली की जानकारी होना आवश्यक है। इसको निम्न स्तरीय लैंग्वेज इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें प्रोग्राम लिखना पूरी तरह से उस कम्प्यूटर पर निर्भर करता है जिस पर यह लिखा जा रहा है। इस लैंग्वेज को पुन: दो अन्य भाषाओं में बांटा जा सकता है।

1. मशीन लैंग्वेज (Machine Languages) -

कम्यूटर एक मशीन है जो केवल विद्युत संकेतों को ही समझ सकती है। इन विद्युत संकेतों को ऑफ या 0(शून्य) व ऑन या 1(एक) द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इन अंको के बायनरी अंक कहते हैं। कम्प्यूटर केवल इन बाइनरी अंकों में दिए गए निर्देशों को समझ सकता है। इन बाइनरी अंको से बनी लैंग्वेज को हम मशीन लैंग्वेज कहते हैं। जैसे- 0100100011100110011.......

2. असेंबली लैंग्वेज (Assembly Languages) -
अंसेबली लैंग्वेज वे भाषाएं होती हैं जो पूरी तरह से मशीन लैंग्वेज पर आधारित होती हैं। लेकिन इनमें 0 व 1 की सीरीज के स्थान पर अंग्रेजी के कुछ अक्षरों व कुछ चुने हुए शब्दों का कोड के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इन कोडों को नेमोनिक कोड या शाब्दिक कोड के नाम से जाना जाता है।
3. हाई लेवल लैंग्वेज (High Level Languages) -

जैसा कि लो-लेवल लैंग्वेज के लिए बताया गया कि प्रोग्राम लिखने के लिए कम्प्यूटर की आंतरिक कार्यप्रणाली का ज्ञान होना जरूरी है। दूसरा प्रत्येक कम्प्यूटर की अपनी अलग मशीनी भाषा और असेम्बली भाषा होती है। अत: एक तरह के कम्प्यूटर के लिए इन भाषाओं में लिखा गया प्रोग्राम दूसरी तरह के कम्प्यूटरों के लिए बेकार हो जाता है। अत: ऐसी प्रोग्रामिंग भाषाओं का विकास किया गया जो सिस्टम की आंतरिक कार्यप्रणाली पर आधारित न हो और जिनमें लिखे गए प्रोग्रामोंको किसी भी प्रकार के सिस्टम पर चलाना संभव हो। इन भाषाओं को हाई लेवल भाषा कहा जाता है। हाई लेवल प्रोग्रामिंग भाषा में इंग्लिश के चुने हुए शब्दों व साधारण गणित में प्रयोग किए जाने वाले चिह्नों का प्रयोग किया जाता है। इन भाषाओं में प्रोग्राम लिखना उनमे गलतियों का पता लगाना और उनको सुधारना लो लेवल भाषा की तुलना में आसान होता है। सभी प्रोग्राम हाई लेवल भाषा मे ही लिखे जाते हैं।

हाई लेवल प्रोग्रामिंग भाषाओं को भी उनकी प्रकृति के अनुसार दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है।

1. विधि अभिमुखी भाषाएं (Procedure Oriented Languages)
2. समस्या अभिमुखी भाषाएं (Problem Oriented Languages)

प्रमुख हाई लेवल लैंग्वेज:
1. बेसिक
2. फोरट्रॉन
3. लोगो
4. कोबोल
5. पास्कल
6. सी
7. सी++
8. अल्गोल
9. कोमाल
10. पायलट
11.स्नोबॉल
12. प्रोलॉग
13. फोर्थ जेनरेशन लैग्वेज (4जीएल)

वायरस आपके कम्प्यूटर में निम्न प्रकार से आ सकता है-   1. संक्रमित प्रोग्राम के उपयोग से 2. संक्रमित फाइल के उपयोग से 3. संक्रमित फ्लापी डिस्क के साथ डिस्क ड्राइव में कम्प्यूटर बूट करने से 4. पाइरेटेड सॉफ्टवेयर के उपयोग से  

कम्प्यूटर वायरस

परिचय (Introduction)
कम्प्यूटर वायरस अपने आप कम्प्यूटर में आ जाने वाला प्रोग्राम कोड होता है, जो बाहरी स्रोत द्वारा तैयार किया जाता है। दुनिया का पहला कम्प्यूटर वायरस Elk Cloner था, जो 'इन द वाइल्ड' ने प्रकट किया था। यह कम्प्यूटर वायरस एप्पल डॉस 3.3 ऑपरेटिंग सिस्टम में फ्लॉपी डिस्क के जरिए फैलता है। कम्प्यूटर वायरस हमारे कम्प्यूटर में तबाही लाने वाला प्रोग्राम होता है, जो आपकी फाइलों और ऑपरेटिंग सिस्टम में उपस्थित सूचनाओं को बिना आपकी जानकारी अथवा चेतावनी के नुकसान पहुंचाता है। कम्प्यूटर वायरस के फैलने का सबसे आसान जरिया नेटवर्क, इंटरनेट और ई-मेल का बढ़ता हुआ उपयोग है। आमतौर पर कम्प्यूटर वायरस आपके कम्प्यूटर में निम्न प्रकार से आ सकता है-
 

1. संक्रमित प्रोग्राम के उपयोग से
2. संक्रमित फाइल के उपयोग से
3. संक्रमित फ्लापी डिस्क के साथ डिस्क ड्राइव में कम्प्यूटर बूट करने से
4. पाइरेटेड सॉफ्टवेयर के उपयोग से
 

कम्प्यूटर वायरस अपने आप जेनरेट नहीं होते, बल्कि ये वायरस लोगों द्वारा पूरी सूझ-बूझ से तैयार किए गए प्रोग्राम होते हैं। कुछ लोग इसे अपने कम्प्यूटर की सुरक्षा के लिए प्रयोग करते हैं तो कुछ लोग इसे विध्वंस मचाने के लिए तैयार करते हैं। कम्प्यूटर वायरस के प्रकार
वायरस कई प्रकार के होते हैं, परन्तु अधिकांश वायरस को मुख्यत: तीन भागों में बांटा गया है-

1. बूट सेक्टर
2. फाइल वायरस
3. मैक्रो वायरस


Wednesday, May 22, 2019

माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस in Hindi. Introduction: Microsoft Word, Excel, Excess, Power Point

माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस

परिचय (Introduction)
माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस परस्पर संबंधित डेस्कटॉप अनुप्रयोगों और सेवाओं का समूह है, जिसे सामूहिक रूप से ऑफिस सूट कहा जाता है। माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस सर्वप्रथम सन् 1989 में माइक्रोसॉफ्ट कॉर्पोरेशन द्वारा मैक- OS के लिए शुरू किया गया। उसके पश्चात सन् 1990 में विंडोज के लिए प्रथम संस्करण लाया गया। माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस 3.0 ऑफिस सूट का विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रथम संस्करण था। उसके बाद माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस 4.3, माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस 95, माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस 2000, माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस ङ्गक्क तथा माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस 3003, माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस 2010 हैं। माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस के अंतर्गत मुख्यत: चार प्रोग्राम आते हैं-

1. माइक्रोसॉफ्ट वर्ड
2. माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल
3. माइक्रोसॉफ्ट एक्सेस
4. माइक्रोसॉफ्ट पॉवर प्वाइंट
 

एमएस ऑफिस के ये प्रोग्राम अलग-अलग प्रकार के कार्यों को करने के लिए प्रयोग में लाए जाते हैं, लेकिन इन सभी की कार्यप्रणाली लगभग एक जैसी है। जिसमें किसी एक प्रोग्राम पर कार्य करना सीखने के बाद अन्य प्रोग्रामों को सीखना सरल हो जाता है। यही नही एमएस ऑफिस के एक प्रोग्राम से दूसरे प्रोग्राम में कोई चित्र, सामग्री या सूचनाएं लाना ले जाना अत्यन्त सरल है इसलिए इनसे हर प्रकार के मिश्रित कार्य का भी कम्प्यूटरीकरण किया जा सकता है।

माइक्रोसॉफ्ट वर्ड (Microsoft Word)--
माइक्रोसॉफ्ट वर्ड माइक्रोसॉफ्ट कॉर्पोरेशन द्वारा विकसित वर्ड प्रोसेसर है। इसका मुख्य कार्य दस्तावेज को संचालित करना है। यह एक वर्ड प्रोसेसिंग पैकेज है, जिसकी सहायता से साधारण दैनिक पत्र व्यवहार से लेकर डेस्कटॉप पब्लिशिंग स्तर के कार्य सुविधापूर्वक किए जा सकते हैं। इसमें परम्परागत मेन्युओं के साथ ही टूल बार की सुविधा भी उपलब्ध है। जैसे- कॉपी करना, कट करना, जोडऩा, खोजना एवं बदलना, फॉन्ट, स्पेलिंग एंड ग्रामर की जॉच करना, बुलेट्स तथा नंबरिंग आदि। माइक्रोसॉफ्ट वर्ड 2007 तथा 2010 में दस्तावेजों को विभिन्न भाषाओं में अनुवादित करने की सुविधा भी उपलब्ध है।

एम.एस.वर्ड

जैसे ही आप 2007 Microsoft Office सिस्टम स्थापित और सक्रिय करते हैं, निर्देश और जानकारी स्वचालित रूप से प्रस्तुत या उपलब्ध होते हैं।  पहली बार वर्ड 2007 खोलने पर आप उसकी नई दिखावट से आश्चर्यचकित हो सकते हैं| अधिकांश परिवर्तन रिबन में ही हैं, जो कि Word के शीर्ष पर एक विस्तृत क्षेत्र है।रिबन प्रचलित आदेशों को सामने लाता है, ताकि आपको बार-बार किए जाने वाले कार्यों के लिए प्रोग्राम के विभिन्न भागों में न ढूँढना पढ़ें। 
आखिर बदलाव क्यों हैं ? जी हमारा उत्तर ये होगा कि आपके कार्य को आसान और शीघ्र बनाना रिबन का उपयोग अनुभवों के गहन शोद के बाद डिज़ाइन किया गया है जिसे माइक्रो सॉफ्ट के कार्य कर्ताओं ने बहुत ही सुन्दर तरीके से सजाया है।  

एम्.एस.वर्ड को ओपन करने के लिए टास्क बार पर बने बटन पर माउस से बाये बटन से क्लिक करें उसके बाद या तो रन कमांड में winword लिखे या प्रोग्रामस में जाएँ फिर दायें तीर के निशान कि और बड़ते हुए माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस में एम् एस वर्ड का चुनाव कर एंटर कुंजी दबाएँ या बाएं बटन से क्लिक करे। 

 

यहाँ पर सबसे ऊपर बाएं कोने में एक गोल बटन नजर आता है जिसे ऑफिस बटन कहते हैं जिसका उपयोग आप एक नई फाइल बनाने में एक मौजूदा फ़ाइल को खोलने, एक फ़ाइल को बचाने के लिए, और कई अन्य कार्य करने के लिए मेनूका उपयोग कर सकते हैं.

और उस के पास में तीन बटन वाला एक छोटा सा बॉक्स जिसे त्वरित पहुँच उपकरण पट्टी(quick access toolbar) कहते हैं  जिसका उपयोग आप अपनी फाइल को सुरक्षित  करने के लिए आपके द्वारा लिए गए कार्य को पूर्ववत करने, और कार्य को  वापस लेने के लिए होता  है। 

ऑफिस बटन के पास  एक तीर का चीन नजर आता है, जिसे  त्वरित पहुँच उपकरण पट्टी अनुकूलित (customize quick access toolbar) कहते हैं। इस तीर के चिन्न से हम इस पट्टी पर और बटन लगा या हटा सकते हैं। 

यहाँ सब ले पहले होम टैब  में  हम कट कॉपी पेस्ट आदि के बारे में जानेंगे 

जेसा कि आप पहले पेंट, नोटपैड, में पढ़ा वेसे ही यहाँ पर भी है परन्तु यहाँ पर होम तब में तीन और नहीं चीज देखने को मिलेंगी 1. पेस्ट में paste as hyperlink, 2. format painter, 3. clipboard. यहाँ सब का वर्णन निचे दिया गया है देखे -
सब से पहले हम वर्ड की एक नयी फाइल ओपन करते हैं और उसमे कुछ लिखते हैं फिर लिखे हुए टेक्स्ट को सेल्लेक्ट करने के बाद  होम टेब में कट बटन  का उपयोग करते है तो हमारा वह लेख जिसे हमने सेल्लेक्ट किया है वो उस जगह से हट जाता है और क्लिप बोर्ड में सेव हो जाता है। वहां से हम इसे जहाँ चाहे वहां पेस्ट कर सकते हैं पेस्ट का मतलब चिपकाना होता है  ठीक इसी प्रकार जब हम सेल्लेक्ट डाटा को कॉपी करते है तो वो भी क्लिपबोर्ड में सुरक्षित हो जाता है  परन्तु जेसे कट  कमांड से डाटा उस जगह से हट गया था यहाँ वह नहीं हटता  नहीं है। क्लिपबोर्ड में वही डाटा रहता है जो हमने बाद में किया है जेसे कॉपी वाला डाटा अब क्लिपबोर्ड में रहेगा। अर्थात 

ØCut (Ctrl+X) :-  इस कमांड का प्रयोग सेलेक्ट किये हुए Matter को हटाकर Clipboard में रखने के लिए किया जाता है] जेसा की आपने पहले पेंट]नोटपैड या वर्डपैड में पढ़ा परन्तु यहाँ पर हम क्लिपबोर्ड को प्रत्यक्ष देख सकते है।  

 

ØCopy (Ctrl+C) :- इस कमांड का प्रयोग सेलेक्ट Matter को Clipboard में Copy करने के लिए किया जाता है। 
ØPaste (Ctrl+V) :- इस कमांड का प्रयोग Clipboard में रखे हुए Text को अपने फाइल में Top Left Side es Paste किया जा सकता है। यदि आवश्यकता हो तो जहाँ पर आप ने कर्सर रखा है वहां पर भी ये Paste किया जा सकता है।
ØPaste Special:- इस कमांड के प्रयोग से Cut या Copy वाला Matter कुछ अन्य तरीके से (जैसे पिक्चर फॉर्मेट) Paste किया जाता  है। जैसे ही हम Paste Special Option पर क्लिक करते है एक Dialog Box Open होता है जैसे निचे चित्र में दिखाया गया है। यहाँ इसमें किसी भी आप्शन को चुनकर OKबटन पर क्लिक करते है तो वह Matter जो हमने कट या कॉपी किया था वह चुने हुए फॉर्मेट में पेस्ट हो जाएगा। 

 

ØPaste as Hyperlink(Ctrl+Shift+C):- इस कमांड के द्वारा जब हम कोई हाइपर लिंक बनते है और उस लिंक से जब वो फाइल खोलते है तो उस फाइल से जो भी डाटा कॉपी होता है उस को हम paste as hyperlink कर सकते है यानि कॉपी वाला डाटा भी यहाँ पर लिंक बन जाता है। इस का उपयोग हम बार बार हाइपर लिंक न बनाना पड़े इस लिए उस को एक बार उसे करते हैं। 

ØFormat Painter(Ctrl+Shift+C):- इस कमांड के प्रयोग से किसी भी शब्द, वाक्य आदि में जो भी डिजाईन आप ने दी है वो किसी दुसरे शब्द, वाक्य पर लगा सकते हो। ये कॉपी जेसा ही है परन्तु अंतर ये है कि  कॉपी से डाटा पूरा का पूरा छप जाता यदि हम किसी एक अक्षर, शब्द या वाक्य पर उसे लगाना चाहें तो, जबकि फॉर्मेट पेंटर से केवल उस शब्द पर फॉर्मेट ही आता है न की पूरा शब्द जो हमने सेलेक्ट किया है। 

 

नोट:- ­Paste कमांड तभी काम करेगी जब Matter Cut या Copy किया हुआ होता है। तथा ऑफिस 2010 या 2013 में यहाँ पेस्ट में इस तरह ही एक और छोटी विन्डियो नजर आती है इस में जो आप्शन दिए गए है उसे हम बाद में पढेंगे।





कम्प्यूटर सामान्य ज्ञान डाटा निरूपन Introduction: Analog Operations, Digital Operation, Fundamental Ingredient of IT, Communication Process, computer networks and types of networks (Learn in Hindi)

कम्प्यूटर सामान्य ज्ञान डाटा निरूपन

परिचय (Introduction)-

कम्प्यूटर, यूजर द्वारा दिए गए विभिन्न प्रकार के डाटा तथा निर्देशों को संग्रहित करता है जैसे- ध्वनि, संख्या, टैक्स, ग्राफिक्स, रेखाचित्र आदि। ये सभी डाटा तथा निर्देश अलग-अलग होते हैं। परन्तु कम्प्यूटर में इन सभी डाटा तथा निर्देशों को एक ही भाषा तथा स्वरूप में संगृहित किया जाता है। ये स्वरूप 0 तथा 1 के रूप में होते हैं। यूजर द्वारा दिए गए सभी प्रकार के डाटा तथा निर्देश डाटा प्रतिनिधित्व के 0 तथा 1 इन दो अंकों में परिवर्तित हो जाते हैं। इस प्रक्रिया को 'डाटा निरूपण' कहते हैं। डाटा निरूपण दो क्रियाओं के माध्यम से किया जाता है-

1. एनालॉग क्रियायें
2. डिजिटल क्रियायें

एनालॉग क्रियायें (Analog Operations)-

वे क्रियायें, जिनमें अंकों का प्रयोग नहीं किया जाता एनालॉग क्रियायें कहलाती हैं। एनालॉग क्रियाओं का प्रयोग मुख्य रूप से विज्ञान तथा इंजीनियरिंग क्षेत्रों में किया जाता है। क्योंकि इन क्षेत्रों में भौतिक मात्राओं का प्रयोग अधिकाशत: किया जाता है, जैसे- स्पीडोमीटर, वोल्टमीटर, थर्मामीटर,..

डिजिटल क्रियायें (Digital Operation)-

आधुनिक कम्प्यूटर डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक परिपथ (digital electronic circuits) द्वारा निर्मित होते हैं। इस परिपथ का मुख्य भाग ट्रांजिस्टर होता है जो दो अवस्थाओं 0-1 में कार्य करता है। कम्प्यूटर में डाटा को व्यक्त करने वाली इन दो अवस्थाओं को सम्मिलित रूप से बाइनरी संख्या प्रणाली binary number system) कहते हैं। बाइनरी संख्या प्रणाली को संक्षेप में बिट (Bit) कहा जाता है।

4 बिट्स = 1 निबल
8 बिट्स = 1 बाइट

1024 बाइट्स = 1 किलोबाइट (KB)
1024 किलोबाइट = 1 मेगाबाइट (MB)
1024 मेगाबाइट = 1 गीगाबाइट (GB)
1024 गीगाबाइट = 1 टेराबाइट (TB)

सूचना-प्रौद्योगिकी

परिचय (Introduction)
कम्प्यूटर का विकास कई दशकों पहले ही हो चुका है, परन्तु आधुनिक युग में कम्प्यूटर की क्षमता, गति, आकार एवं अन्य कई विशेषताओं में आश्चर्यजनक बदलाव हो रहे हैं। इन सभी सूचनाओं में सूचना प्रौद्योगिकी के आविष्कार ने कई असम्भव बातों को सम्भव बना दिया है। हम घर बैठे दूर स्थित अपने किसी मित्र व संबंधी के साथ चैंटिंग करना, रेलवे-वायुयान टिकट आरक्षित करा सकते हैं। कम्प्यूटर के विकास के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी भी विकास के पथ पर अग्रसर है। सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग डाटा संचार के रूप में, व्यपार, घर, बैंकों इत्यादि स्थानों पर मुख्य रूप से किया जाता है। दूसरे शब्दों में ज्ञान की नई शाखा को सूचना प्रौद्योगिकी कहते हैं।


सूचना-प्रौद्योगिकी के मौलिक घटक(Fundamental Ingredient of IT)

संचार प्रक्रिया, कम्प्यूटर नेटवर्क, ई-मेल आदि सूचना-प्रौद्योगिकी के मौलिक घटक हैं। इनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है-

संचार-प्रक्रिया (Communication Process)

दो विभिन्न या समान डिवाइसों के मध्य डाटा तथा सूचनाओं के आदान प्रदान को डाटा संचार एवं इस सम्पूर्ण प्रक्रिया को संचार-प्रक्रिया कहते हैं। संचार-प्रक्रिया निम्नलिखित माध्यमों के द्वारा सम्पन्न होती है-
1. संदेश
2. प्राप्तकर्ता
3. प्रेषक
4. माध्यम
5. प्रोटोकॉल

कम्प्यूटर नेटवर्क (Computer Network)
सूचनाओं या अन्य संसाधनों के परस्पर आदान-प्रदान एवं साझेदारी के लिए दो या दो अधिक कम्प्यूटरों का परस्पर जुड़ाव कम्प्यूटर नेटवर्क कहलाता है। कम्प्यूटर नेटवर्क के अंतर्गत संसाधनों एवं सूचनाएं एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर तक समान रूप से पहुंचती है। कम्प्यूटर नेटवर्क एक कंपनी अथवा भवनों, एक कमरे तथा शहर के मध्य स्थापित किए जाते हैं।



नेटवर्क के प्रकार(Types of Network)
नेटवर्क विभिन्न प्रकार के होते हैं परन्तु मुख्यत: नेटवर्क तीन प्रकार के होते हैं-

1. लोकल एरिया नेटवर्क- लैन (Local Area Network- LAN)
वह नेटवर्क जो केवल एक भवन, कार्यालय अथवा एक कमरे तक सीमित होते हैं, लोकल एरिया नेटवर्क कहलाते हैं। इस नेटवर्क के अंतर्गत कई कम्प्यूटर आपस में संयोजित रहते हैं। परन्तु इनका भौगोलिक क्षेत्र एक या दो किमी. से अधिक नहीं होता है। रिंग, स्टार या कम्प्लीटली कनेक्टेड नेटवर्क आदि लैन के उदाहरण हैं।


2. मैट्रोपोलिटन एरिया नेटवर्क- मैन (Metropolitan Area Network- MAN)
एक या एक से अधिक लोकल एरिया नेटवर्कों को एक साथ जोड़कर बनाए गए नेटवर्क को मैट्रोपोलिटन एरिया नेटवर्क कहते हैं। यह नेटवर्क वृहद स्तरीय नेटवर्क है, जो कई कार्पोरेटों से मिलकर बना होता है। मैन की गति अत्यधिक तीव्र होती है, परन्तु लैन की अपेक्षा धीमी होती है।


3. वाइड एरिया नेटवर्क- वैन (Wide Area Network- WAN)
वह नेटवर्क जो मंडलीय, राष्टरीय, अंतरराष्टरीय एवं प्रादेशिक स्तर पर जोड़े जाते हैं, वाइड एरिया नेटवर्क कहलाते हैं। वैन में उपग्रह द्वारा कम्प्यूटर टर्मिनलों को आपस में जोड़ा जाता है। उदाहरण के लिए- मुबंई में रहकर दिल्ली से कोलकाता का आरक्षण करना या कनाडा से सिंगापुर की फ्लाइट का आरक्षण केवल वैन द्वारा ही संभव है। वैन की गति, लैन तथा मैन की अपेक्षा धीमी होती है।

ई-मेल (E-mail)
ई-मेल सूचना प्रौद्योगिकी की एक अद्भुत देन है, जिसके द्वारा दूरभाष तथा टेलीग्राम, फैक्स तथा पोस्टकार्ड इत्यादि पारंपरिक संचार सेवाओं को आसानी से केवल कुछ ही सेकेंडों में प्रेषित किया जा सकता है। ई-मेल की शुरुआत सबसे पहले हॉटमेल नामक कंपनी ने की। जिसने www.hotmail.com के जरिए सेवायें प्रारम्भ की। आज हॉटमेल विश्व की सबसे बड़ी ई-मेल इंटरनेट कंपनी है।




Tuesday, March 19, 2019

How to make the small colourful idlis for kids-




Preparation Time:

Cooking Time:

Serves: 3 serve

Cooking Measurements

Ingredients:3 cups Idli Batter (homemade or readymade)Oil, for greasingSalt to tasteVegetable Sambar, for serving (optional)Coconut Chutney, for serving (optional)

Directions:

buy it readymade from the store.

If the batter is in the refrigerator, take it out from the refrigerator at least 30 minutes before making idlis (bring it to room temperature). If the batter has no salt, add salt to it and mix well.

Pour 1-2 glasses water in a wide and deep pan or in a dhokla/idli steamer and place it on the stovetop over medium flame. Place a stand inside it (if the mould has the attached base stand, no need to place the stand).


  1. step-5
    Pour batter into each mould using a spoon.
  2. step-6
    Place the idli stand inside the pan/steamer. Cover the pan with a lid and steam it over medium flame for 7-8 minutes.
  3. step-7
    Remove the lid and check the idlis by inserting a toothpick in the center. If it comes out clean, it means it is cooked perfectly.
  4. step-8
    Let it cool for 3-4 minutes. Remove them using a spoon. They will come out easily. Transfer them to a plate or a casserole and cover with a lid to keep them hot. Serve hot idlis with vegetable Sambar and coconut chutney.
Tips and Variation To serve them as a party snack (like dhokla), mix them with the tempering mixture (tadka) of mustard seeds, curry leaves, cumin seeds and coriander leaves like dhokla
  • To make the small colourful idlis for kids-
    1. For orange idlis – grind 1 cup idli batter with 1 grated carrot.
    2. For green idlis – grind 1 cup idli batter with 1/2 cup lightly packed spinach (or coriander leaves).
    3. For pink idlis – grind 1 cup idli batter with ¼ cup grated beetroot.
    4. For yellow idlis – mix turmeric powder with idli batter

स्किन की हर समस्या से छुटकारा दिलाएगी ये चीज

स्किन की हर समस्या से छुटकारा दिलाएगी ये चीज

एग व्हाइट को इस तरह इस्तेमाल करने से मिलगी निखरी हुई त्वचा और दूर होंगी स्किन की समस्याएं.

अंडे का सफेद हिस्सा स्किन को बनाएगा चमकदार

हम सबको पता है कि अंडे प्रोटीन का सबसे अच्छा स्रोत है. अंडे के सफेद हिस्से में प्रोटीन और एलबुमिन की प्रचुर मात्रा होती है जिससे स्किन टोनिंग होती है. इन गुणों की वजह से झुर्रियों से मुक्त त्वचा भी मिलती है. सूरज की रोशनी, प्रदूषण, स्मोकिंग, एल्कोहल, मोटापा, खानपान की आदतें, कैमिकल भरे स्किन प्रोडक्ट, डिहाइड्रेशन की वजह से त्वचा का इलैसटिन और कोलेजन नष्ट हो जाता है. इससे त्वचा पर पिंपल्स, झुर्रियां और उम्र के निशान नजर आने लगते हैं. एग व्हाइट फेस मास्क से स्किन टाइट होती है और यह त्वचा का सारा तेल सोख लेता है. यही नहीं, इसमें पाए जाने वाले विटामिन्स और मिनरल्स त्वचा के लिए फायदेमंद होते हैं. घर में बने इस मास्क के इस्तेमाल से आपको स्मूथ और चमकती हुई त्वचा मिलेगी.

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स्किन टाइटनिंग-

एग व्हाइट्स में ऐसे गुण होते हैं जो त्वचा के पोरों को छोटा कर स्किन टाइट बनाने में मदद करते हैं. आप एग व्हाइट मास्क बनाकर उसमें नींबू में डाल सकती हैं. इसे अपने चेहरे पर लगाएं. कुछ मिनट तक इंतजार करें. इसके बाद गुनगुने पानी से धुल लें. आप सप्ताह में दो बार इसका इस्तेमाल कर सकती हैं.

ऑयली स्किन के लिए शानदार-

ऑयली स्किन में मुंहासो और एक्ने की बहुत ज्यादा समस्या होती है. एग व्हाइट्स ऑयली स्किन के लिए भी बहुत कारगर है. इससे आपकी त्वचा में मौजूद अतिरिक्त तेल बाहर निकल जाता है. मास्क लगाने से पहले अपने चेहरे को गुनगुने पानी से धुल लें. अंडे की पतली परत चेहरे पर लगाएं और सूख जाने दें. सूखने के बाद ठंडे पानी से धुल लें. अपने चेहरे को पोंछने के लिए मुलायम तौलिए का इस्तेमाल करें.

कील-मुंहासों से छुटाकरा दिलाए-

ऐक्ने ऑयली स्किन या त्वचा की ऊपरी परत पर धूल जमा होने की वजह से होते हैं. एग व्हाइट से आपकी त्वचा का एक्स्ट्रा तेल निकल जाता है जिससे अपने आप ऐक्ने और पिंपल खत्म हो जाते हैं. जिन जगहों पर एक्नै हों, वहां पर सावधानी से मास्क लगाएं. सख्त ब्रश का इस्तेमाल ना करें. योगर्ट, हल्दी भी इसमें ऐड कर सकते हैं.

चेहरे के बाल हटाए-

चेहरे पर उगे छोटे-छोटे बालों से छुटाकारा दिलाने में भी एग व्हाइट मददगार है. माथे, गाल और अपर लिप्स पर छोटे-छोटे बाल हटाने के लिए एग व्हाइट लगा सकते हैं. जब यह सूख जाए तो मास्क को खींचकर हटा लें.

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